भोजपुरी पंचायत के बेवसाइट बनावे के क्रम में भोजपुरी में गीत आ कविता के लेखन गति पकड़े लागल। हम गवें-गवें ओह घरी प्रकाशित हो रहल भोजपुरी के वेब पतरिकन में प्रकाशन खातिर आपन रचना भेजे लगनी आ हमार रचना प्रकाशितो होखे लागल। कुछ ई-पत्रिका जइसे मैना ,अंजोरिया, भोजपुरिया डॉट काम आ कुछ हिन्दी समाचार पत्र जइसे वर्तमान अंकुर, गज केसरी युग में हमार रचना छपे लागल। भोजपुरी पंचायत के हर अंक में हमार दू गो कविता हर महिना प्रकाशित होते रहल। एह सगरी रचनन के फोटो भा लिंक हम अपना फेसबुक टाइम लाइन पर शेयर जरूर करत रहीं, जेकरा चलते साहित्यकार आ कवि लोग हमरा से जुड़े लागल।एही क्रम में हमरा फेसबुक के मित्रता सूची में हमार फुफेरा बहनोई मोहन द्विवेदी जी जुड़लें आ हमरा टाइम लाइन पर शेयर कई गो हिन्दी आ भोजपुरी कवितन के पढ़ला का बाद हमरा के फोन कइलें आ बात होते के साथे अपना घरे बोलवलें। अतवार के दिन रहे, हम 10-15 मिनट के भीतरे उहाँ के घरे चहुंप गइनी। बहिन-बहनोई से आशीर्वाद लीहला का बाद उहाँ के शिकायती लहजा बात शुरू कइनी । शिकाइत ई रहे कि आजु ले हम उहाँ से अपना लेखन का विषय में काहें ना बतवली।बात-बतकही के ई क्रम 2-3 घंटा ले चलल होखी। उहाँ के कई गो आपन कविता सुनवने आ हमरो से सुनलें। हमरा के अपना लेखन के भाषा खातिर भोजपुरी भाषा अपनावै क सुझाओ दीहलें।
कुछ दिन बाद द्विवेदी जी संस्कार भारती के गोष्ठी में हमरा के लिया के गइलें आ हमार ओह गोष्ठी में जुटल कवि लोगन से परिचय करववलें। अगिला सप्ताह ‘अमर भारती’ के गोष्ठी रहे, उहों द्विवेदी जी का संगे जाये के मोका भेंटाइल। गोष्ठी में आवे-जाये क सिलसिला चल देहलस। हम हर गोष्ठी में आपन भोजपुरी कविता भा गीत पढ़ीं। गाजियाबाद के साहित्यकारन के नजरिया भोजपुरी के लेके नीमन ना रहे, बाकिर हम तय क चुकल रहीं कि गोष्ठी भा मंच कवनो होखे , रचना त भोजपुरिये पढ़े के बा।हमरा एह निश्चय से दिल्ली आ गाजियाबाद के साहित्यकार लोग परिचित होखे लागल रहे। भीतरे-भीतर ढेर लोग चिढ़े लागल बाकिर द्विवेदी जी आ डॉ जयप्रकाश मिश्रा जी के हमरा पूरा सह आ सहजोग मिलत रहे। संस्कार भारती क अगिली गोष्ठी मोहन द्विवेदी जी के घर पर रहे,उहाँ भोजपुरी के एगो चर्चित साहित्यकार कवि मनोज भावुक जी आइल रहलें। उहाँ से हमार पहिले एगो मुलाकात रहल बाकि घनिष्ठता ओह गोष्ठी के बादे भइल।महिना भर का भीतरे हम संस्कार भारती के शास्त्री नगर, गाजियाबाद इकाई के अध्यक्ष मनोनीत हो गइनी। दिल्ली में होखे बाली भोजपुरी के गोष्ठिन में आवा-जाही होखे लागल रहे।
दिल्ली-एन सी आर में पूर्वाञ्चल भोजपुरी महासभा,गाजियाबाद एगो नामचीन संस्था बिया, जवन करीब चार दशक से भोजपुरी के सांस्कृतिक कार्यक्रमन के आयोजन करत आ रहल बिया। संगही करीब 10 बरीस से भोजपुरी के राष्ट्रीय कवि सम्मेलनों आयोजित करत आ रहल बा। गोष्ठी के अगिला दिने दूनों जने मोहन द्विवेदी ज आ मनोज भावुक जी के संस्था अध्यक्ष के बोलहटा पर जाये के रहे। दूनों जने हमरो के उहाँ से मिलवावे खातिर अगिला दिने अपना संगे लिवा के गइल लोग । पूर्वाञ्चल भोजपुरी महासभा के अध्यक्ष आदरणीय अशोक श्रीवास्तव जी से उहाँ के स्कूल ‘आर डी मेमोरियल पब्लिक स्कूल’ घूकना में भेंट भइल। द्विवेदी जी आ भावुक जी आदरणीय अशोक श्रीवास्तव जी से एगो भोजपुरी कवि आ भोजपुरी एक्टिविस्ट का रूप में हमार परिचय करवलें। आदरणीय अशोक श्रीवास्तव जी बड़ा धधा के मिललें। बातचीत का क्रम में उहाँ के हमरा से भोजपुरी कवितों सुनलें आ ओह बरीस सितंबर में होखे वाला कवि सम्मेलन में एगो कवि का रूप में सामिल होखे ला नेवतबो कइलें। हमरा ला दिल्ली- एन सी आर से भोजपुरी के बड़ मंच पर कविता पढ़े क पहिल अवसर रहे। ओह कार्यक्रम के बाद साहित्य जगत के लोग हमरा के एगो भोजपुरी कवि का रूप पहिचाने लागल।
ओह कार्यक्रम के बाद आदरणीय अशोक श्रीवास्तव जी से हमार अक्सर बात-चीत होखे लागल। भोजपुरी पंचायत के हर अंक के 10 प्रति हम उनुका इहाँ पहुंचावे लगनी। गवें-गवें उनुका से आत्मीयता बढ़े लागल। उनुका के अपना माई भाषा भोजपुरी आ संस्कृति से बहुत गहिराह लगाव बा। उनुका व्यक्तित्व सहज आ सम्मोहक बा। जवना के जाने, समुझे आ अपना जिनगी में ढेर कुछ उतारे क हमरो सोभाग मिलल। उनुका भीतरी अपना माई भाषा भोजपुरी खातिर ढेर कुछ करे क इच्छा हर घरी हिलोर मारत रहेला। उहाँ के माई भाषा भोजपुरी के उत्थान ला जवन तन-मन-धन का संगे समरपन के भाव बा, उ बिरले कतों भेंटाला।कहलो गइल बा कि ‘भोजपुरिया समाज के लोग भाउक होला आ अपना परम्परा ,जड़-जमीन,गाँव-जवार आ रीति रेवाज से जुड़ल रहेला।’ ई सगरी गुन अशोक श्रीवास्तव जी के झोरी में भर भर के बा। एही का चलते भोजपुरी भाषा के एगो समरपित सिपाही का रूप में दुबई आ मोरीशस जइसन देसन में अपना भाषा क प्रतिनिधित्व क चुकल बाटें। गाजियाबाद में उहाँ के लोग भोजपुरी भाषा आ संस्कृति क एगो बरियार खम्हा का रूप में जाने-पहिचाने लन।पूर्वाञ्चल आ भोजपुरी भाषा भासी लोगन के सहजोग ला अशोक श्रीवास्तव जी हर घरी तत्पर रहेलन।
हमरा के उहाँ से अपने भाषा खातिर काम करेला हर तरह के सहजोग, समरथन आ माहौल मिलल बा । एह दिसाई मिलला पर उहाँ के हमार मनोबल बढ़ावे में जरिको कोताही ना करेलन। अद्भुत सामर्थ्यवान रहला का बादो उहाँ के सभका संगे हमरो से विचार समय-समय पर लेत रहेलन। ‘भोजपुरी साहित्य सरिता’ मासिक पत्रिका के प्रिंट रूप निकालल उनुका वोजह से संभव हो पावल। उहाँ के ‘भोजपुरी साहित्य सरिता’ के सरक्षकों बानी। सन् 2017 में हमरे भोजपुरी के पहिल किताब ‘पीपर के पतई’के विमोचन ला एगो लमहर कार्यक्रम करवलन। जवना में प्रो0 मैनेजर पाण्डेय, अजीत दुबे,संतोष पटेल,मनोज भावुक, उदय नारायण सिंह जइसन लोगन के उपस्थिति रहल। हम आपन तीसरकी किताब ‘आखर आखर गीत’ जवन एगो गीत संग्रह बा, उहाँ के हम समरपित कइले बानी। जवना पर हमरा के हिन्दुस्तानी अकेडमी, प्रयागराज से भिखारी सम्मानों मिल चुकल बा। अजुवो हम ठसक का संगे कह सकीले कि आदरणीय अशोक श्रीवास्तव जी हमरे साहित्यिक जतरा के एगो सम्बल बानी। उनुका से पहिल बेर जवन नेह-नाता जुड़ल,तवन दिनो- दिन गहिराह आ बरियार होत आगु बढ़ रहल बा।
- जयशंकर प्रसाद द्विवेदी
संपादक
भोजपुरी साहित्य सरिता