लेबै नाही उतराई, हमरा भाई हउवा हो।
हमरा भाई हउवा हो, हमरा भाई हउवा हो
लेबै नाही उतराई, हमरा भाई हउवा हो।
जवन इहाँ हमार हौ धंधा,उहै बाटै तहरो।
हम नदिया से पार उतारी,तू भवसागर डहरो।
नीत पुरखन के निभाई, हमरा भाई हउवा हो।
लेबै नाही उतराई, हमरा भाई हउवा हो।
एह काठ के नइया से एतना मिलै मजूरी
रहे न केहु भूखा होखै सभके जरूरत पूरी
ई किरिया गंगा माई, हमरा भाई हउवा हो।
लेबै नाही उतराई, हमरा भाई हउवा हो।
पाँव पखरली रउरे निहरली, भरल नाही मनवा
लौटत के बेर प्रभुजी दिहा हमके दरसनवाँ
हमै जइहा जनि भुलाई, हमरा भाई हउवा हो।
लेबै नाही उतराई, हमरा भाई हउवा हो।
हमरा इहे रिन हौ प्रभु जी, रखिहा एकर ध्यान
जब हम आइब तहरा ठावें, रखिहा हमरो मान
जब तहरे घाटे आईं, हमरा भाई हउवा हो।
लेबै नाही उतराई, हमरा भाई हउवा हो।
- जयशंकर प्रसाद द्विवेदी